इबादत: मक़सद-ए-हयात की तकमील
इबादत महज़ चंद मख़सूस (विशिष्ट) आमाल मुक़र्ररा औक़ात में अल्लाह तआला को याद कर लेना या कुछ मरासिम (रस्मों) की अदायगी का नाम नहीं, बल्कि यह एक मुकम्मल तर्ज़-ए-हयात (जीवन…
हदीस की इस्लामी हैसियत: एक इल्मी तहक़ीक़ी जायज़ा
इस्लाम एक जामे (व्यापक) और आफ़ाक़ी (वैश्विक) दीन है, जो क़यामत तक आने वाली इंसानियत की तमाम रूहानी, अख़लाक़ी और समाजी ज़रूरतों पर मुहीत (व्याप्त) है। इस दीन की असास…
सहीफ़ा-ए-तक़दीर: क्या सब कुछ पहले से तय है?
ज़िंदगी ख़ुशी और ग़म, कामयाबी और नाकामी, उम्मीद और मायूसी का मजमुआ (संग्रह) है। बाज़ औक़ात हम अपनी मेहनत के बावजूद नताइज (परिणाम) वैसे नहीं पाते जैसे चाहते हैं, और…
आमाल की गठरी इंसाफ़ के तराज़ू में
इस्लाम के बुनियादी अक़ायद में से एक अक़ीदा आख़िरत पर ईमान है। यह ईमान का पाँचवाँ रुकन है इसका मतलब यह है कि हम इस बात पर यक़ीन रखें कि…
अनवार-ए-हिदायत के रोशन चराग़: अंबिया-ए-किराम अलैहिमुस्सलाम
ईमान के बुनियादी अरकान में से एक अहम रुकन अल्लाह तआला के नबियों पर ईमान लाना है। इसका मतलब यह है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह तआला ने हर…
क़ुरान करीम : इल्मी व अदबी मोजिज़ा
क़ुरान करीम, इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू पर मुहीत एक मुकम्मल ज़ाबता-ए-हयात है। यह वह इल्मी मोजिज़ा है जिसकी रोशनी क़यामत तक आलम-ए-इंसानियत को राह दिखाती रहेगी। इसका एजाज़ सिर्फ़…
आसमानी किताबें: रुश्द-ओ-हिदायत के सरचश्मे
अल्लाह तआला की जानिब से नाज़िल करदा आसमानी किताबें इंसानियत के लिए रुश्द-ओ-हिदायत के सरचश्मे हैं। यह वह इलाही दस्तावेज़ हैं जिन्होंने तारीकी (अंधेरे) में भटकती इंसानियत को रोशनी अता…
फ़रिश्ते : निज़ाम-ए-इलाही के निगहबान
कायनात की हर हरकत एक पोशीदा निज़्म व नसक़ की गवाह है, जहाँ अल्लाह तआला के नूरानी बंदे ख़ामोशी से अपने फ़राइज़ अंजाम दे रहे हैं। ये फ़रिश्ते अम्र-ए-इलाही के…
दीन-ए-इस्लाम : हयात-ए-इंसानी का लाज़वाल दस्तूर
दुनिया का हर शख़्स अपने सपनों की मंज़िल तलाश करने में सरगर्दाँ है।कोई सरसब्ज़ वादियों में सुकून ढूंढ रहा है,तो कोई आसमान की वुसअतों में अपना मुक़द्दर तलाश कर रहा…
अल्लाह तआला पर ईमान : इस्लाम की रूह, ईमान का रुक्न-ए-आज़म
यह कायनात अपनी वुसअतों में फैली हुई एक अज़ीम किताब की मानिंद है, जिसका हर सफ़्हा अल्लाह तआला के वजूद की गवाही देता है। चमकते हुए सितारे, बहते हुए दरिया,…
ज़िक्रुल्लाह: बंदगी की मेराज
इख़्लास : आमाल-ए-सालिहा के लिए शर्त
कुफ़्र: अपने हक़ीक़ी मोहसिन की बदतरीन नाशुुक्री
बिदअत: दीन में तहरीफ़ (बदलाव)
शिरक: एक ना-क़ाबिले माफ़ी जुर्म
निफ़ाक़, ईमान के लिए नासूर
तशब्बोह: तहज़ीबी ख़ुदकुशी
इस्लामी मुआशरे के दो बुनियादी उसूल: मसावात, एहतराम इन्सानियत
तीन ख़ुशनसीब मुसाफ़िर: आमाल-ए-सालिहा के साये में









